सौर मण्डल
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सौर मंडल का मुख्य रूप - 8 ग्रह, 1 बौना ग्रह, क्षुद्रग्रह पट्टी तथा एक धूमकेतू को दर्शाता हुआ (पैमाने के अनुसार नहीं)। | |
| आयु | 4.568 अरब वर्ष |
|---|---|
| स्थिति | स्थानीय अंतरतारकीय बादल, स्थानीय बुलबुला, शिकारी-हन्स भुजा, दुग्ध मेखलाआकाशगंगा |
| तंत्र द्रव्यमान | 1.0014 सौर द्रव्यमान |
| निकटतम सितारा | प्रॉक्सिमा सेन्टॉरी (4.22 प्रकाश वर्ष), मित्र तारा प्रणाली (4.37 प्रकाश वर्ष) |
| निकटतम ज्ञात ग्रहीय मण्डल | ऍप्सिलन ऍरिडानी तारा प्रणाली (10.49 प्रकाश वर्ष) |
| ग्रहीय मण्डल | |
| बाहरी अर्द्ध प्रमुख धुरी ग्रह (वरुण) | 4.503 अरब कीमी (30.10 ख० इ०) |
| क्विपर चट्टान की दूरी | 50 ख० इ० |
| ज्ञात तारों की संख्या | 1 |
| ग्रहों की संख्या | 8 |
| ज्ञात बौने ग्रहों की संख्या | 5 (दर्जनों से अधिक की पुष्टि का इन्तजार) |
| हीन ग्रहों की संख्या | 587,527[1] |
| धूमकेतुओं की संख्या | 3,155[2] |
| पहचाने गए गोले उपग्रहों की संख्या | 19 |
| गेलेक्टिक केंद्र के लिए कक्षा | |
| अविकारी सतह कागैलेक्टिक सतह की ओर झुकाव | 60.19° (ecliptic) |
| गैलेक्टिक केंद्र की दूरी | 27,000±1,000 ly |
| कक्षीय गति | 220 km/s |
| कक्षीय अवधि | 225–250 Myr |
| सितारा संबंधित गुण | |
| तारों का वर्गीकरण | G2V |
| फ्रॉस्ट लाइन (खगोलशास्त्र) | 2.7 ख० इ० |
| हेलीपॉज की दूरी | ~120 ख० इ० |
| पहाड़ी क्षेत्र त्रिज्या (radius) | ~1–2 प्रकाश वर्ष |
सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह,बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल।[3][4] हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है।[5][6] इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके 166 ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं।
सौर मंडल के चार छोटे आंतरिक ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह जिन्हें स्थलीय ग्रह कहा जाता है, मुख्यतया पत्थर और धातु से बने हैं। और इसमें क्षुद्रग्रह घेरा, चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा और बिखरा चक्र शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना दूरी से परे मौजूद हो सकता है।
सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह (सौर हवा) सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं, जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई तश्तरी के बीच तक जाता है।